एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट, भारत में कुंवारों में आत्महत्या करने की प्रवृति कम
देश में कुंवारों की तुलना में शादीशुदा लोगों में खुदकुशी करने की प्रवृत्ति ज्यादा बनी हुई है। वर्ष 2009 के दौरान आत्महत्या के सरकारी आंकड़ों पर वैवाहिक स्थिति के लिहाज से नजर डाली जाए तो पता चलता है कि इस साल खुदकुशी करने वालों में 70.4 फीसदी लोग शादीशुदा थे, जबकि कुंवारे लोगों की संख्या महज 21.9 प्रतिशत थी। मनोविज्ञानियों के मुताबिक ये आंकडे़ भारतीय समाज में निरंतर घटती व्यक्तिगत सहनशीलता और वैवाहिक रिश्तों में भावनात्मक ऊष्मा की कमी की ओर इशारा करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009 में देश में आत्महत्या के कुल एक लाख 27 हजार 151 मामले दर्ज किए गए थे जिसमें से आत्महत्या करने वाले 58 हजार 192 लोग शादीशुदा पुरुष थे जबकि विवाहित महिलाओं का यह आंकड़ा 31,300 का रहा। दूसरी ओर, इस दौरान खुदकुशी करने वाले कुंवारे पुरुषों की संख्या 17,738 रही वहीं शादी के बंधन में नहीं बंधने वाली 10,063 महिलाओं ने मौत को गले लगाया। इस साल आत्महत्या का कदम उठाने वाले लोगों में 4.3 प्रतिशत विधुर या विधवा के दर्जे वाले थे। खुदकुशी करने वालों में 3.4 प्रतिशत लोग तलाकशुदा थे या किसी वजह से अपने जीवनसाथी से अलग रह रहे थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2009 में खुदकुशी के मामलों में पुरुष-स्त्री अनुपात 64:36 का था, यानी इस दौरान जान देने वाले हर सौ लोगों में 64 पुरुष और 36 महिलाएं थीं। एक और चिंताजनक पहलू की ओर ध्यान खींचते हुए आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2009 में आत्महत्या करने वाले हर पांच लोगों में से एक गृहिणी थी। आत्महत्या पर एनसीआरबी के आंकड़ों को आंखें खोल देने वाला बताते हुए मनोचिकित्सक दीपक मंशारमानी ने कहा कि भारतीय समाज के ताने-बाने में आ रहे बदलावों के कारण व्यक्तिगत सहनशीलता लगातार कम होती जा रही है। आम तौर पर यह देखने में आता है कि किसी व्यक्ति के मन में हालात से निराशा की लहर आती है और वह चंद पलों में जान देने का सबसे बड़ा फैसला कर लेता है। डॉ. मंशारमानी के मुताबिक कुंवारों के मुकाबले विवाहितों में जान देने की प्रवृत्ति ज्यादा होना स्पष्ट करता है कि वैवाहिक रिश्तों में अब पहले जैसी भावनात्मक ऊष्मा नहीं रह गई है और ये संबंध धीरे-धीरे किसी पेशेवर भागीदारी की तासीर अख्तियार करते जा रहे हैं।
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