उत्तर प्रदेश में अभी भी 85 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पीने के पानी और 2024 स्कूलों में टॉयलेट की सुविधा नहीं है। स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के बारे में राज्य सरकार की ओर से दिए गए हलफनामे में यह तथ्य उजागर हुआ है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों को स्कूलों में पेय जल और टॉयलेट सुविधा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिन स्कूलों में टॉयलेट नहीं हैं वहां माता-पिता अपने बच्चों, विशेषकर लड़कियों को स्कूल नहीं भेजते। ये शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्यों को स्कूलों में ये सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप मिश्रा ने हलफनामा में कहा है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी कुल मिलाकर 21,482 माध्यमिक स्कूल हैं। इन सभी स्कूलों में पीने का पानी तथा टायलेट की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा राज्य में 1,46,959 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें से 1,46,874 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा है, लेकिन 85 स्कूलों में अभी भी यह सुविधा नहीं है। यहां पीने के पानी का स्थायी इंतजाम नहीं हो पाया। क्योंकि कुछ जगह बोरिंग के बाद भी पानी नहीं निकला जबकि कुछ जगहों पर इसके दूसरे कारण थे। इन 85 स्कूलों में से 55 स्कूल गांवों में हैं और 30 स्कूल शहरी क्षेत्र में आते हैं। हालांकि इनमें अस्थायी तौर पर पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य सरकार स्कूलों में टायलेट सुविधा की उपलब्धता पर भी ध्यान दे रही है। जिलाधिकारियों से इस बाबत रिपोर्ट मांगी गई थी। जिसके जवाब में मिले आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1,46,959 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में से 2024 विद्यालयों में टॉयलेट की सुविधा नहीं है। राज्य सरकार ने कहा है कि शहरी क्षेत्र के टॉयलेट रहित स्कूलों में टॉयलेट बनवाने के लिए फंड का प्रस्ताव केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा गया है।
No comments:
Post a Comment