Tuesday, March 20, 2012

समलैंगिकता को दिल्ली सरकार का भी समर्थन

समलैंगिकता को लेकर हाईकोर्ट के फैसले को विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भले ही सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी हो लेकिन केंद्र सरकार के साथ अब दिल्ली सरकार भी समलैंगिकता पर दिए गए हाईकोर्ट के निर्णय के पक्ष में है। इस संबध में दिल्ली सरकार सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष शपथपत्र देकर यह स्पष्ट करेगी कि हाईकोर्ट के निर्णय पर केंद्र सरकार की राय का दिल्ली सरकार समर्थन करती है। दिल्ली सरकार के एक सव्रे के मुताबिक दिल्ली में 28000 समलैंगिक हैं जिनमें 7.9 प्रतिशत लोग एड्स का शिकार हैं। समलै¨गकता को लेकर हाईकोर्ट ने जुलाई 2009 में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए दो बालिग समलैंगिकों के बीच आपसी सहमति से बनाए जाने वाले संबध को मान्यता दी थी और स्पष्ट किया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 का प्रयोग दो बालिग युवकों द्वारा आपसी सहमति से बनाए जाने वाले आपसी यौन संबधों पर नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह फैसला समलैंगिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रही संस्था नाज फाउंडेशन की एक याचिका पर दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले को अनेक संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले में दिल्ली सरकार भी एक पक्ष है तथा दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग व एडस नियंतण्रसोसायटी को भी अपना पक्ष भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखना है। इस बाबत केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि समलैंगिकता पर हाईकोर्ट के फैसले में कुछ भी गलत नहीं है। केंद्र सरकार के इस रुख से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार समलैंगिकता के पक्ष में है। केंद्र सरकार के बाद अब दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की राय पर ही चलने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को दिल्ली सरकार के मत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता में हुई। बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र के मसौदे पर विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार बैठक में हालांकि एक-दो मंत्री हाईकोर्ट के निर्णय से पूरी तरह सहमत नहीं थे लेकिन बाद में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि दिल्ली सरकार का कोई भी निर्णय केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ नहीं होगा। केबिनेट सदस्यों का कहना था कि यदि केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ कोई राय दी जाती है तो इससे अच्छा संदेश नहीं जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि समलैंगिकता पर हाईकोर्ट के निर्णय को लेकर जो भी केंद्र की राय है उसी राय का समर्थन करते हुए दिल्ली सरकार भी अपना शपथपत्र सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश करेगी। सूत्रों के अनुसार इस संबध में दिल्ली सरकार की ओर से दो शपथपत्र पेश किए जाएंगे जिसमें एक शपथपत्र स्वास्थ्य विभाग की ओर से होगा जबकि दूसरा शपथपत्र एड्स नियंतण्रसोसायटी की ओर से होगा। गौरतलब है कि दिल्ली में लगभग 28000 समलैंगिक हैं जिनमें 7.9 प्रतिशत एड्स का शिकार हैं। सरकार का मानना है कि यदि इन लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल करने के लिए इन लोगों के बीच स्वास्थ्य विभाग को काम करना है तो इन्हें कानूनी दायरे से मुक्त करना आवश्यक है।

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