देश की जनसंख्या में से लगभग आधे लोगों के पास घर में अपना शौचालय नहीं है। वह खुले में शौच जाते हैं, लेकिन इससे अधिक लोगों के पास अपना मोबाइल फोन है। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने मकान, घरेलू सुविधाओं और संपत्ति पर वर्ष 2011 के आकंड़ा जारी किए। इन आकड़ों के अनुसार भारत के 24.66 करोड़ घरों में से केवल 46.9 फीसद घरों में शौचालय की सुविधा है। 49.8 फीसद खुले में शौच जाते हैं। 3.2 फीसद सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। झारखंड इस सूची में शीर्ष पर है, जहां 77 फीसद घरों में कोई शौचालय की सुविधा नहीं है। इस मामले में ओड़िशा दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर है। यहां क्र मश: 76.6 फीसद और 75.8 फीसद घरों में शौचालय नहीं है। गृह सचिव की ओर से जारी आकड़ों के अनुसार हालांकि 63.2 फीसद घरों में टेलीफोन और 53.2 फीसद के पास मोबाइल फोन है। टेलीफोन के मामले में लक्षद्वीप सबसे आगे है, जहां 93.6 फीसद घरों में अपना मोबाइल सेट है। इसके बाद दिल्ली और केंद्रीय संघ शासित प्रदेशों दिल्ली और चंडीगढ़ का नम्बर है, जहां क्र मश: 90.8 फीसद और 89.2 फीसद 89.2 फीसद घरों में अपना टेलीफोन सेट है। इसके अतिरिक्त 62.5 फीसद ग्रामीण जनता अभी भी खाना बनाने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करती है, जबकि 44.8 फीसद लोग परिवहन के लिए साइकिल प्रयोग करते हैं। वहीं इंटरनेट सुविधा के साथ कम्प्यूटर 3.1 फीसद जनसख्या के पास पहुंच चुका है। महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त सी चंद्रमौली ने यहां कहा कि खुले में शौच देश के लिए अभी भी बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। पारंपरिक कारण और शिक्षा की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। इस मोच्रे पर काफी कुछ करने की जरूरत है।’
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