राजधानी दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय भले ही देश में सर्वाधिक हो लेकिन दिल्ली के बच्चे ही सबसे ज्यादा कुपोषण के शिकार हैं और उनका शारीरिक विकास सही तरीके से नहीं हो रहा है। शहरी गरीब परिवारों में 57.7 प्रतिशत 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे कुपोषण व पर्याप्त भोजन न मिलने केकारण औसत कद से छोटे हैं और कई तरह के संक्रमण का शिकार हैं। मध्यम वर्ग में भी करीब 38 प्रतिशत बच्चों का कद कुपोषण के कारण कम है। यह बच्चे अंडरवेट होने के साथ- साथ एनीमिया के भी शिकार हैं। यह खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सव्रे-3 में हुआ। दिल्ली सरकार ने इन आंकड़ों को नकार दिया और वास्तविक आंकड़े एकत्र करने के लिए नया सव्रे कराने की बात कही है। कुपोषण के कारण मासूम बच्चों के शारीरिक विकास में आ रही इस कमी को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर मिशन न्यूट्रीशियन काउंसिल का गठन किया गया है जिसका मकसद देश के सभी राज्यों में एक मिशन के रूप में कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाना है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्वयं बच्चों के कुपोषण को लेकर गंभीर हैं और कुपोषण को दूर करना उनकी प्राथकिमताओं में शामिल है। नेशनल फैमिली हेल्थ सव्रे-3 (एनएफएचएस) 2005- 06 में किया गया था लेकिन सामने आये आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2008-09 में दिल्ली के आंकड़ों पर पुन: मंथन हुआ। पता चला कि शहरी गरीब वर्ग में 57.7 प्रतिशत पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे कुपोषण के कारण कद में छोटे, वजन में कम और एनीमिया के शिकार हैं। उनका विकास भी सही ढंग से नहीं हो रहा है। मिशन न्यूट्रीशियन काउंसिल की ओर से यह आंकड़े मंगलवार को एक बैठक में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सामने भी रखे गए। जो आंकड़े बैठक में रखे गए उनके अनुसार मध्यमवर्गीय परिवारों के 37.9 प्रतिशत बच्चों के अलावा समूची दिल्ली में औसतन 42.2 प्रतिशत 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। एनएफएचएस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में गरीब परिवारों के 45.9 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है जबकि इस वर्ग के 67 प्रतिशत बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। इसी तरह 5 वर्ष से कम आयु के मध्यमवर्गीय 23 प्रतिशत बच्चे औसत वजन से कम हैं तथा 54 प्रतिशत बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। आंकड़ों के अनुसार पोषण की दृष्टि से महिलाओं की स्थिति भी बदतर है। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में 15 से 49 वर्ष आयु की गरीब वर्ग की 51.4 प्रतिशत शहरी महिलाएं कुपोषण के कारण एनीमिया की शिकार हैं। इसी आयु वर्ग की मध्यम वर्गीय महिलाओं में भी 43.6 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण के कारण एनीमिया की शिकार हैं। बैठक में मिशन न्यूट्रीशियन के पदाधिकारियों ने जब इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त कर मुख्यमंत्री से आवश्यक कदम उठाने को कहा तो सरकार ने इन आंकड़ों को ही खारिज कर दिया। बैठक में मौजूद समाज कल्याण मंत्री प्रो. किरण वालिया का कहना है कि जो आंकड़े पेश किए गए वह सत्य से परे हैं उन पर विास नहीं किया जा सकता। दिल्ली में बच्चों के उचित पोषण के लिए मिड डे मील, आईसीडीएस आदि योजनाओं के अलावा आंगनवाड़ी स्तर पर भी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आंकड़ों में मध्यमवर्गीय परिवारों के 38 प्रतिशत बच्चों को भी कुपोषण का शिकार बताया गया है जो आश्चर्यजनक है। बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना सरकार का लक्ष्य है। सरकार ने मिशन न्यूट्रीशियन से कहा कि नए सिरे से कोई सव्रे कराया जाए और यदि सरकार के स्तर पर किए जा रहे उपायों में कोई कमी है तो वह भी बताई जाए ताकि उन्हें दूर किया जा सके। उन्होंने बताया कि नए सिरे से एक सव्रे कराने पर सहमति बनी है। सव्रे एक वर्ष में पूरा होगा। सव्रे के आधार पर ही सरकार अपनी आगामी योजनाएं बनाएगी।
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