Monday, December 19, 2011

देश में जन्म लेते ही मर जाते हैं 5 फीसद बच्चे

देश में हर एक हजार नवजात बच्चों में से 50 दम तोड़ देते हैं, जबकि एक लाख महिलाओं में से 230 की प्रसव के दौरान मृत्यु हो जाती है। सरकार ने हालांकि सहसाब्दि विकास लक्ष्यों के तहत 2015 तक नवजात मृत्यु दर 28 प्रति एक हजार जन्म और मातृ मृत्युदर 106 प्रति एक लाख जन्म पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री सुदीप बंदोपाध्याय ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि वि स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में नवजात मृत्यु दर 50 है और वह घटते क्र म में अन्य देशों की सूची में 49वें नंबर पर आता है। इस सूची में 134 की दर के साथ अफगानिस्तान सबसे ऊपर है। हालांकि घाना, बांग्लादेश, सोलोमन आइलैंड, गुयाना और जमैका जैसे कई देश इस मामले में भारत से बेहतर स्थिति में हैं। डब्ल्यूएचओ के ही 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में मातृ मृत्युदर 230 प्रति एक लाख जन्म है। दुनिया के अनेक देशों की सूची में भारत 55वें स्थान पर आता है। हालांकि जमैका, श्रीलंका, त्रिनिदाद टोबेगो, यूक्रेन, सऊदी अरब आदि देशों की स्थिति भारत से बेहतर है। उन्होंने बताया कि केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु ने पांच साल के कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर और मातृ मृत्यु दर के संबंध में आंके गए लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है। दिल्ली ने पांच साल के कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर को कम करने का लक्ष्य पूरा किया है। बंदोपाध्याय ने बताया कि लैंसेट की अप्रैल 2011 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2009 में मृत जन्मे बच्चों की दर 22.1 प्रति एक हजार जन्म यानी करीब 5.8 लाख थी, जबकि भारत के महापंजीयक की नमूना पंजीयन पण्राली के आंकड़ों के अनुसार उस साल यह दर आठ प्रति एक हजार जन्म यानी करीब 2.1 लाख थी।

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