Monday, February 21, 2011

आरक्षण के नाम पर आमने-सामने जातियां


आरक्षण बचाने और हटाने के संघर्ष में एक बार फिर जातियां आमने-सामने हो गयी हैं। रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी इसका गवाह बनी। दोनों पक्षों ने अपने अपने तरकश से विचारों के तीर छोड़े। इन तीरों के सीधे निशाने पर सर्वसमाज की बुनियाद थी, जो दरकती नजर आई। सहकारिता भवन में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने आरक्षण के पक्ष में, जबकि सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने गन्ना सभागार में आरक्षण के विपक्ष में विमर्श आयोजित किया। सहकारिता भवन के विमर्श में शामिल लगभग सभी वक्ताओं ने आरक्षण के बहाने 15 और 85 प्रतिशत का नारा उछाल कर एक लकीर खींच दी। इन वक्ताओं ने अनुसूचित जाति, जन जाति, पिछड़ी जाति और मुसलमानों को लामबंद करने का आह्वान सिर्फ आरक्षण तक केन्दि्रत नहीं किया। कमोबेश सबने आने वाले समय में एक नये सियासी समीकरण पर जोर दिया। हक के लिए लंबी लड़ाई का आह्वान किया। पिछड़ों को साथ जोड़ने और अगड़ों पर आक्रामक होने की इनकी रणनीति साफ-साफ दिखी। गौर करें तो वर्ष 1993 में अनुसूचित जाति, पिछड़ों और मुसलमानों को एक साथ जोड़ने का प्रयोग सपा और बसपा ने मिलकर किया था और सूबे में गठबंधन की सरकार भी बनाई थी। मण्डल कमीशन की सिफारिशों के बाद 15 और 85 के बीच खिंची लकीर के दृष्टिगत ही तबका गठबंधन था। यद्यपि दो साल के भीतर आपसी टकराव में सपा और बसपा की राहें जुदा हो गयीं। तबसे अब तक अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति को एक साथ जोड़ने की कवायद विभिन्न मुद्दों के बहाने शुरू हुई, लेकिन परवान नहीं चढ़ी। अलबत्ता बसपा ने सपा के साथ समझौते का प्रयोग असफल होने के बाद अगड़ों को साथ जोड़कर एक नया फार्मूला शुरू कर दिया, लेकिन हाल के दिनों में पदोन्नति में आरक्षण के मसले को लेकर टकराव शुरू हो गया है। सर्वजन हिताय समिति ने पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे को लेकर जो अभियान शुरू किया है, उसमें पिछड़ी जाति के अधिकारियों-कर्मचारियों की भरपूर भागीदारी है। आरक्षण समर्थक इस समीकरण को तोड़ने का भी रास्ता तलाश रहे हैं। आरक्षण समर्थकों का जोर पिछड़ी जाति के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रभावित करने का है। इसीलिए आरक्षण संरक्षण सम्मेलन में मंच पर पिछड़ी जाति के अवधेश कुमार वर्मा को बतौर संयोजक प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन की कमान भी वर्मा ही संभाले रहे। यद्यपि वर्मा के अलावा पिछड़ी जाति का कोई दूसरा प्रमुख परिदृश्य में नहीं था। पिछड़ी जाति के एक और नेता राकेश सिंह मंच पर पीछे बैठे थे।

No comments:

Post a Comment