किशोरियों का कम उम्र में गर्भधारण करना ही उनकी मौत का सबसे बड़ा कारण है। सेव द चिल्ड्रेन नामक संस्था ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। इसमें कहा गया है कि प्रसव के समय संक्रमण या बीमारी हो जाने से हर साल दस लाख किशोरियों की मौत हो जाती है। इस समस्या का सबसे बड़ा कारण गर्भनिरोधकों से अनभिज्ञता बताया गया है। लाइबीरिया मेंएक-तिहाई नवजात शिशुओं की मांओं की उम्र 15 से 19 वर्ष के बीच होती है। संस्था के प्रोजक्ट मैनेजरर जॉर्ज किजाना के अनुसार, कम उम्र में मां बनने से इन लड़कियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि शारीरिक तौर पर बच्चे को जन्म देने में अक्षम होती हैं। रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों में 40 प्रतिशत जन्म गैर-इरादतन होता है। किशोरियों को परिवार नियोजन की सुविधा उपलब्ध ही नहीं हो पाती है। बड़ी आबादी वाले देशों खास तौर पर दक्षिण एशिया में ऐसा देखने को मिलता है। भारत में 15 से 19 वर्ष की 47 प्रतिशत लड़कियां सामान्य वजन से कम हैं। जबकि 56 प्रतिशत लड़कियां रक्त की कमी से पीडि़त हैं। भारत में 2008 में हुए एक सर्वेक्षण में 15 से 24 साल के बीच उम्र के बीच की लड़कियों में आधी से ज्यादा ने कहा कि उन्हें कभी भी यौन शिक्षा नहीं मिली। जहां 30 प्रतिशत ने कंडोम के बारे में अपनी अनभिज्ञता जताई वहीं 77 प्रतिशत ने कहा कि उनसे कभी किसी ने गर्भनिरोधक के बारे में बात नहीं की। भारत में 15 से 19 साल केबीच शादी होने वालों की संख्या 30 प्रतिशत है। इस उम्र में शादी करने वाले लड़कों की संख्या केवल पांच प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में गर्भनिरोधक और परिवार नियोजन के कई कार्यक्रम कभी पैसे की कमी तो कभी धार्मिक कारणों से सफल नहीं हो पाएं हैं।
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