Monday, April 9, 2012

बेतहाशा बढ़ेगी भारत की शहरी आबादी


संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया की जनसंख्या और शहरीकरण के रुझान पर शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद 2025 तक एक करोड़ से अधिक आबादी वाले शहर होंगे। दुनिया में ऐसे नगरों की संख्या 37 तक पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले चार दशक में भारत और चीन की शहरी जनसंख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे इन देशों को अपने नागरिकों को रोजगार, ऊर्जा, घर और बुनियादी ढांचे मुहैया कराने की नई चुनौती से जूझना होगा। राजधानी दिल्ली तीन करोड़ 29 लाख की आबादी के साथ दुनिया में जापान की राजधानी टोक्यो (तीन करोड़ 87 लाख) के बाद सर्वाधिक आबादी वाला दूसरा शहर होगा। मुंबई दो करोड़ 66 लाख के साथ चौथे और कोलकाता एक करोड़ 87 लाख के साथ 12वें स्थान पर होगा। बेंगलुरू की आबादी एक करोड़ 32 लाख, चेन्नई की एक करोड़ 28 लाख और हैदराबाद की एक करोड़ 16 लाख हो जाएगी तथा दुनिया में उनका स्थान क्रमश: 23वां, 25वां और 31वां होगा। दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले प्रथम दस शहर होंगे- टोक्यो, दिल्ली, शंघाई, मुम्बई, मेक्सिको सिटी, न्यूयार्क, साओ पाउलो, ढाका, बीजिंग और कराची। संयुक्त राष्ट्र से जारी आंकड़ों में मुख्य नगरों की आबादी में उपनगरों के निवासियों को भी शामिल किया गया है। दुनिया में शहरों और गांवों में जनसंख्या के बदलते अनुपात के बारे में कहा गया है कि 2050 तक शहरी आबादी में 72 प्रतिशत की वृद्धि होगी तथा यह वर्तमान तीन अरब 60 करोड़ से बढ़कर छह अरब तीस करोड़ हो जाएगी। ग्रामीण आबादी 2050 तक करीब तीन अरब होगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट वि शहरीकरण संभावना समीक्षा 2011’ में कहा गया है कि अगले चार दशक में नगरीय जनसंख्या में सबसे अधिक बढ़ोतरी अफ्रीका और एशिया में होगी। शहरी और ग्रामीण आबादी का अनुपात इस समय 52 और 48 प्रतिशत है जो 2050 तक 67 प्रतिशत और 33 प्रतिशत हो जाएगा। वर्ष 2011 से 2030 के बीच दुनिया में शहरी आबादी में एक अरब 40 करोड़ की वृद्धि होगी। जिसमें चीन में करीब 28 करोड़ और भारत में करीब 22 करोड़ की बढ़ोतरी होगी। वर्ष 2010 से लेकर 2050 तक भारत में 49.7 करोड़ और अधिक शहरी आबादी जुड़ जाएगी।

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