Monday, August 1, 2011

ज्यादा रिटर्न देने वालों को शराब का परमिट


अहमदाबाद शराबबंदी वाले गुजरात में अब ज्यादा आयकर देने वाले ही शराब का मजा ले सकेंगे। राज्य के नशाबंदी विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत 3-5 लाख रुपये का सालाना आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों को ही शराब का परमिट दिया जाएगा। अभी तक 48 हजार सालाना आय वालों को परमिट दिया जाता है। आजादी के बाद से गुजरात में शराब पीना, पिलाना व बेचना गैरकानूनी है। डॉक्टर की सिफारिश पर सरकार शराब के परमिट जारी करती है जिसके तहत कामचलाऊ, पर्यटन, गुजरात प्रवास, समूह के आधार तथा तत्काल परमिट देने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद सूबे में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शराबबंदी कानून को लचीला बनाने का प्रयास किया था। इसके तहत गुजरात के बाहर से आने वालों को एयरपोर्ट या होटल पर ही शराब परमिट उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय सेमिनार और कार्यशाला में शराब परोसने की छूट दे दी गई थी। राज्य में वर्तमान में शराब के लिए चालीस हजार परमिट जारी किए गए हैं, हाल में मासिक चार हजार रुपए आवक होने पर शराब के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। हाल ही में गृह विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव बलवंत सिंह ने नशाबंदी विभाग को निर्देश जारी किया है, कि कम आय वाले परमिट धारक लाइसेंस का दुरुपयोग करते हैं। कम आवक के चलते उनके द्वारा शराब की अवैध बिक्री की आशंका बढ़ जाती है इसलिए लाइसेंस जारी करने के लिए आवेदक की सालाना आय तीन से पांच लाख रुपए होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए सरकार आयकर रिटर्न को प्रमुख आधार बनाना चाहती है ताकि उसके आधार पर आवेदक की सही आय का पता लगाया जा सके। नशाबंदी विभाग ने गृह विभाग के निर्देश पर इस प्रकार का एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। मसौदे की मंजूरी पर अंतिम मुहर सरकार को लगानी है। राज्य में हाल में शराब के चालीस हजार लाइसेंस जारी किए गए हैं जिनमें सबसे अधिक सूरत, वडोदरा में है। करीब बीस हजार लाइसेंस मेडिकल आधार पर जारी किए गए हैं जबकि साढे़ पंद्रह हजार लाइसेंस सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को जारी किए गए हैं। करीब दो हजार अन्य उद्देश्यों के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं। गुजरात में शराबबंदी के कारण राज्य सरकार को सालाना 2 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यूबी समूह के अध्यक्ष विजय माल्या ने नरेन्द्र मोदी को सलाह दी थी कि शराबबंदी समाप्त कर सरकार इस नुकसान की भरपाई करे लेकिन सरकार ने इससे इंकार कर दिया। एक अनुमान के मुताबिक गुजरात में अवैध तरीके से सालाना 22 हजार करोड़ की शराब की हेराफेरी होती है जिसमें से 2 से 3 हजार करोड़ रुपए पुलिस की भेंट चढ़ जाते हैं।